बिहार के मुजफ्फरपुर में पंचायत का अनोखा फैसला, पैसे दो और रेप करो.

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rape-reu-759हर बार मैं जब भी इस मुद्दे पर कुछ लिखता हूँ, तो दिमाग में एक ही सवाल आता है, ना जाने कब तक.? कब तक इस मुद्दे पर बहस होगी. ना जाने कब कुछ ऐसा आएगा, जब ये सब यूँ खत्म हो जाएगा जैसे पता भी न चले की ये आया भी था. हर बार दिमाग में एक सवाल आता है की ना जाने लोग कब समझ पाएँगे की ये गलत है.

मैं बात कर रहा हूँ यौन शोषण की, बलात्कार की, जबरन सेक्स की. हर रोज ना जाने कितनी लड़कियां इसकी शिकार होती है. सही सही पूछो, तो कोई आंकड़ा नहीं है. जो भी है, वो अपने मन से बनाया हुआ है, जो दिल आया बोल दो, जो दिल आया लिख दो. आज पुलिस वाले का मूड सही था, कंप्लेंट लिख ली, आकड़ें में शामिल हो जाएगा, आज मूड ठीक नहीं है, गाली दे कर भगा दिया, आंकड़े से बहार रह गया. पहली बात तो रेप का मामला पुलिस तक पहुँचता ही बहुत कम है, हमारे समाज में अगर ऐसा कुछ हो गया तो लोग इसे दवा के छुपा के रखना ज्यादा पसंद करते हैं और करें भी क्यों न, बदनाम कौन होना चाहता है. हम, हमारा समाज कहाँ कोई कसर छोड़ते इस काम में.

खैर, जो खबर है, वो बताते हैं. घटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के, जिब्जोर गाँव की है. बीते शनिवार’, कमला और विमला (बदले हुए नाम) दो बहने जो की बस 5 और 6 साल की हैं अपने घर से खेत की और गए थे अपनी बकरी खोजने. वहां गाँव का ही एक आदमी जो की 65 वर्ष का था, वहां उसने उन्हें बिस्कुट खिलाने का लोभ देकर अपने साथ अपने घर ले गया. और बारी बारी से दोनों बच्चियों का बलात्कार किया. और किसी को ना कहने की बात कह गया. कहा की अगर बताया तो जान से मार देंगे. घर आकर बच्चियों ने तुरंत अपनी माँ को बता दिया. बात फैलने लगी और मामला पहुंचा गाँव के पंचायत में. पूरी पंचायत ने मिल कर ये निर्णय लिया की बच्चियों के माँ बाप को हर्जाना दिया जाएगा. एक बच्ची के लिए 41 हज़ार, दोनों के लिए हो गए 82. और मामला रफा दफा किया जाए. ये कैसा फैसला पैसे दो और रेप करो.?

माँ बाप तैयार नहीं हुए, और थाने गए. थाने में रिपोर्ट लिखवाई गयी, कथित तौर पर करवाई भी हुई, एक अफसर भेजा गया और अब मामला कोर्ट में है. 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

सवाल ये है की हम कैसे समाज में रहते है.? ऐसे समाज में जो हमारी बेटियों की कीमत लगा के गुनहगारों को छोड़ देती है.? हम किस पर भरोसा करते हैं.? कैसी पंचायत.? ये पंचायत है..? ये न्याय है.? हम कब तक ऐसे शिकार होती महिलाओं को पैसे दे कर चुप करवाते रहेंगे? हर रोज न जाने कितने अमीर लोग ऐसे गरीब लोगों की इज्ज़त लुट कर उन्हें पैसे का लालच और जान का डर देकर मुंह बंद करा देते होंगे. हर रोज ऐसी पंचायत बैठती होगी, जिसे बस पैसे की खनक सुनाई देती है, दर्द की चीख नहीं.. 

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