कांग्रेस यूपी मिशन

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congress missionभारत एक लोकतान्त्रिक देश है जहा चुनाव के जरिये लोग अपने नेता को चुनते है | भारत में लोग जो अपना नेता चुनते है, उसका मकसद ही ये होता है कि नेता निष्पक्ष होकर जनता की सेवा करे | और चुनाव में खड़े होने से पहले नेता भी अपना प्रचार प्रसार इस प्रकार करता है कि लोग उससे आकर्षित हो, तथा उनके किये हुए वादों पर ही लोग उन्हें चुनते है | लेकिन होता हमेशा ही इसका उल्टा है जेसे ही कोई नेता चुनाव में जीत हासिल करता है तो अगले कुछ सालो के लिए वो जहा जिस प्रदेश के लिए चुना गया है उससे भूल जाता है | जनता की याद आती है तो कब, जब अगले चुनाव आने वाले होते है | नेता फिर वही नए नए वादों के साथ चुनाव रणनीति के लिए जनता के बिच उतरते है | यही हो रहा है उत्तर प्रदेश में भी | अलग-अलग नेता अलग-अलग पार्टी नए-नए वादे और सपनो के साथ जनता के बीच उतर रहे है |

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इसी रेस में है कांग्रेस पार्टी, जो 2014 में बुरी हार के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में आई है | इस बार काग्रेस जोरो-शोरो के साथ तेयार होकर आई है तभी ही कांग्रेस का नाम सुर्खियों में छा रही है | फिलहाल, देखा जाये तो उत्तरप्रदेश को कांग्रेस का गण राज्य भी कहा जाता है| और 2017 के चुनाव को लेकर कांग्रेस काफी पहले से ही तयारी कर रही थी, राहुल का दौरा हो या सोनिया का बनारसी दौरा सब इसमें शामिल है | 2014 के चुनाव को लेकर देखा जाये तो कोई नही सोच सकता था कि कांग्रेस फिर इस तरह की तेयारी के साथ आएगी | कांग्रेस अभी भी लोगो में लोकप्रिय है ये राहुल और सोनिया की होने वाली रैली में लोगो के उत्साह को देखकर ही लगता है | तो क्या इस बार कांग्रेस की कोई उम्मीद होगी की वो उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने में सफल होगी….